👉 आत्मचिंतन के क्षण 19 Jan 2017

🔴 हमें मूक सेवा को महत्त्व देना चाहिए। नींव के अज्ञात पत्थरों की छाती पर ही विशाल इमारतें तैयार होती हैं। इतिहास के पन्नों पर लाखों परमार्थियों में से किसी एक का नाम संयोगवश आ पाता है। यदि सभी स्वजनों का नाम छापा जाने लगे तो दुनिया का सारा कागज इसी काम में समाप्त हो जाएगा। यह सोचकर हमें प्रशंसा की ओर से उदास ही नहीं रहना चाहिए, वरन् उसको तिलांजलि भी देनी चाहिए। नामवरी के लिए जो लोग आतुर हैं उनको निम्न स्तर का स्वार्थी ही माना जाना चाहिए।
 
🔵 युग परिवर्तन का श्रीगणेश इस प्रकार होगा कि जिनकी अंतरात्मा में भगवान् ने देश, धर्म की बात सोचने-समझने की दूरदृष्टि दी हो वे अपना जीवन लक्ष्य भोग से बदलकर त्याग कर लें। समृद्ध बनने की महत्त्वाकाँक्षा को पैरों तले कुचल दें और प्रबुद्ध बनने में गर्व गौरव अनुभव करने लगे।

🔴 आज प्रबुद्ध लोगों की स्थिति भी यह है कि वे लम्बी चौड़ी योजनाएँ बनाने, वाद-विवाद एवं आलोचना करने में तो बहुत सिर खपाते हैं, पर रचनात्मक कार्य करने के लिए जब समय आता है तो बगलें झाँकते हैं, दाँत निपोरते हैं और तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। इस स्थिति को बदला जाना चाहिए। भावनाशील लोगों को आदर्शवाद की चर्चा करते रहने की परिधि तोड़कर अब कुछ करने के लिए आगे आना चाहिए।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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