Poems


दैनिक सैनिक, १९३५ - परमपूज्य गुरूदेव

      देख-देखकर  बाधाओं को पथिक न धबरा जाना,
सब कुछ करना सहन किंतु मत पीछे पैर हटाना।

कोई भी हो दुश्मन तेरा निश्चय मिट जाएगा,
त्रिंस कोटि हुंकारों से नभमंडल फट जाएगा॥

मलय मरूत हो बंद, बवंडर के प्रचंड झोंके आवें,
शांत हिमालय फटे शिलाएँ, उड़ें चूर हों टकरावें।

परिवर्तन निश्चित है, बहिरे सुनें, आँख अंधे खोलें,
सोने वाले उठें, सिपाही जागें, सावधान हो लें॥
                                                                            

Untitled

      विश्व हितों में जो बढ़कर मिटने की हिम्मत दिखलाएगा।
उसका ही वर्चस्व जगत में युग-युग तक पूजा जाएगा।।

आया है संक्रांति काल कलियुग को अब जाना ही होगा।
उसकी जगह नये सत् युग को और आज आना ही होगा।।
पर वह होगा तभी मनुज जब कर्म क्षेत्र में उतर पड़ेगा।
औ निज श्रम से आगत युग की मनभावन नव...

धर्म तन्त्र के स्वस्थ-रूप को सबल बनाओ रे ।

      धर्म तन्त्र के स्वस्थ-रूप को सबल बनाओ रे ।
जन मानस को आडम्बर से मत भटकाओ रे ॥ 1 ॥

इसी राजपथ पर अतीत ने वह वैभव पाया।
जिस वैभव से “जगतगुरु” यह भारत कहलाया॥
उस वैभव को स्वार्थ सिद्धि में नहीं गवाओ रे ।
धर्म तन्त्र के स्वस्थ-रूप को सबल बनाओ रे ॥ 2 ॥

...

इस समय की अब यही पुकार

      समय की अब यही पुकार मंदिरों में बँटे अब यही प्रसाद,
एक पौधा और थोड़ी सी खाद अब मस्जिद में यही अजान,
दरख्त लगाए हर इंसान । अब गूंजे गुरूद्वारों में वाणी,
दे हर बंदा पौधों को पानी । सभी चर्च दें अब शिक्षा,
वृक्षारोपण येशु की इच्छा ।...

रानी लक्ष्मीबाई को शत-शत नमन!

      इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी।
जल कर जिसने स्वतंत्रता की, दिव्य आरती फेरी।।

यह समाधि यह लघु समाधि है, झाँसी की रानी की।
अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की।।

यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न-विजय-माला-सी।
उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति शाला-सी।।

सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी।
आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी...

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन!

      "लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार

वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी"

झाँसी की सिंहनी माँ लक्ष्मीबाई आज ही के दिन अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थीं। स्वातंत्र्य समर के यज्ञ में...

शुभ प्रभात

      "यार से ऐसी यारी रख,
"दुःख में भागीदारी रख!

"चाहे लोग कहे कुछ भी,
"तू तो जिम्मेदारी रख!

"वक्त पड़े काम आने का,
"पहले अपनी बारी रख!

"मुसीबते तो आएगी,
"पूरी अब तैयारी रख!

"कामयाबी मिले ना मिले,
"जंग हौंसलों की जारी रख!

"बोझ लगेंगे सब हल्के,
"मन को मत भारी रख!

"मन जीता तो जग जीता,
"कायम अपनी खुद्दारी रख!!!...

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