दैनिक सैनिक, १९३५ - परमपूज्य गुरूदेव

देख-देखकर  बाधाओं को पथिक न धबरा जाना,
सब कुछ करना सहन किंतु मत पीछे पैर हटाना।

कोई भी हो दुश्मन तेरा निश्चय मिट जाएगा,
त्रिंस कोटि हुंकारों से नभमंडल फट जाएगा॥

मलय मरूत हो बंद, बवंडर के प्रचंड झोंके आवें,
शांत हिमालय फटे शिलाएँ, उड़ें चूर हों टकरावें।

परिवर्तन निश्चित है, बहिरे सुनें, आँख अंधे खोलें,
सोने वाले उठें, सिपाही जागें, सावधान हो लें॥
                                                                            
परम पूज्य गुरुदेव
‘दैनिक सैनिक, १९३५

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