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प्रयाग के सेट्टिराज की कन्या अर्बुद पांचाल के धनी सेठ पुत्र मणियार को व्याही गई। अर्बुद शिक्षिता थी, ज्ञानवान थी, वैसे ही उसके विचार, कार्य, योजनायें भी स्वच्छ सुन्दर और पवित्र होती थीं। ससुर के यहाँ पैर रखते ही उसने घर को एक नई रोशनी में बदल दिया।

मणियार महान् ईश्वर भक्त था, किन्तु उसका वैयक्तिक जीवन, कुविचार और बुरे आचरणों में ग्रस्त होने के कारण, दुःखी और अशान्त...

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